चिरस्मरणीय पल

                          चिरस्मरणीय पल 


सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविर का आया द्वितीय चरण, 
दि. 24, माह दिसंबर,पहुँचे ग्वालियर हम,
वही उपवन, वही प्रांगण और वही है  के.वि.1., 
बिछुड़े हुए पुनः मिल गए उत्साहित है मन।

स्वागत-वंदन-अभिनंदन से दिवस हुआ प्रारंभ, 
सर्वधर्म समभाव से प्रार्थना करते प्रतिदिन,
सुश्री राजकुमारी महोदया का देखा कुशल निर्देशन, 
आपके आदर्श विचारों से लाभान्वित हुए हैं हम।

श्री मीणा सर का समय-समय पर मिला मार्गदर्शन, 
‘भागीरथी दायित्व’ का हम शिक्षक करें निर्वहन,
श्री रामकुमार सर हरफ़नमौला, हर कार्य में निपुण,
व्याख्यान,चर्चा, हास-परिहास और सुमधुर गायन।

श्री धर्मेंद्र सर का तकनीकी जादू छाया रहा हरदम, 
‘कागज़ बचाओ’ उपलब्धि है, कार्य हुआ ऑनलाइन,
 ई-पत्रिका, ई-प्रतिपुष्टि, ई-डायरी लेखन, 
कंप्यूटर-मोबाइल बने परीक्षा के सरल माध्यम।

श्री अश्विनी सर की सहृदयता ने  मोह लिया है मन, 
किंतु गंभीर ज्ञान समक्ष नतमस्तक हो गए हम,
कार्य प्रबंधन, बाल शिक्षा,परियोजना और तनाव प्रबंधन, 
प्रशासकीय ज्ञान, मानवाधिकार, ‘मानस’ और मानव संसाधन। 
कभी सिखाते, कभी सुधारते,कराते सुप्त ज्ञान का स्मरण, 
ब्रहमा-विष्णु-महेश से पहले पूजनीय हैं गुरुजन।

नव वर्ष की पूर्व संध्या पर हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम, 
मनोरंजन- ज्ञानार्जन हेतु किया शैक्षिक भ्रमण।

बहुत कुछ पाया और पाएंँगे धन्य है के. वि.संगठन, 
चिरस्मरणीय हो गए हैं, ये मधुर स्मृतियों के क्षण। 
अपार आनंद-समृद्धि पाएँ, आप सभी प्रबुद्धजन, 
शुभेच्छाओं का उपहार लाए मंगलमय यह वर्ष नूतन।

                                                          -संध्या जैन 

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