सुनहरे पलों की स्मृतियाँ
सुनहरे पलों की स्मृतियाँ
दिनांक 18 मई से 29 मई तक मैंने केंद्रीय विद्यालय क्र. 1, ग्वालियर में सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविर, स्नातक शिक्षक (हिंदी) में भाग लिया। इन 12 दिनों की सुखद स्मृतियों को एक काव्यात्मक प्रतिवेदन के रुप में प्रस्तुत करती हूँ। कविता में कहीं भी ‘मैं’ नहीं है और जब ‘मैं’ नहीं होता तो रह जाते हैं केवल ‘हम’| ये स्मृतियाँ मेरी व्यक्तिगत नहीं हैं बल्कि इनमें हम सभी शामिल हैं।
शुभेच्छाओं के उपहार लेकर,उपस्थित है समूह ‘सुमन’,
सुनहरे पलों को समेटकर,प्रस्तुत करते हैं प्रतिवेदन।
सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविर में ग्वालियर आए हम,
तापमान 45 डिग्री गर्मी से बेदम,
गर्मी से बेदम, पहुँच गए के.वि. क्रमांक वन,
आप सभी से मिलकर धन्य हो गए हम।
माँ शारदे के दर्शन से ह्रदय हुआ पावन,
पुष्प-सुगंध से महक रहा था कक्ष का वातावरण।
सबसे पहले मिलकर हमने किये चरण वंदन,
पारस्परिक परिचय से फिर किया हार्दिक अभिनंदन।
सुश्री राजकुमारी मैम का स्नेही अपनापन,
श्री मीणा सर की मुस्कान ने दूर किए सब ग़म।
सौम्य, विनम्र, बहु प्रतिभाशाली, हैं संसाधक गण
और एक से एक बढ़चढ़कर आमंत्रित अतिथिगण।
NCF, नवाचार, आदर्शपाठ और हिंदी शिक्षण,
आचार संहिता, राजभाषा, जीवन कौशल और मधुर संप्रेषण।
कवि-कविता,पाठों पर चर्चा, मानक हिंदी व्याकरण,
विद्यालय का प्रबंधन और कक्षा-कक्ष नियंत्रण|
कोई ज्ञाता, कोई व्याखाता और परामर्शदाता,
खेल-खेल में ही जुड़ जाता कंप्यूटर से नाता।
कभी पी पी टी, कभी टंकण, तो कभी कोई ब्लॉग बनाता,
अपनी सभी समस्याओं का सरल निदान पाता।
साथियों ने भी अपने गुण से मोह लिया है मन,
गीत, कविता, लोकगीत और गाए खूब भजन।
खानपान-आवास व्यवस्था देख हुए प्रसन्न,
प्रतिदिन खाते थे हम मनपसंद व्यंजन।
‘कसक से ठसक’ की ओर बढ़ चले अब हमारे कदम,
अगली बार मिलेंगे फिर उत्साहित है मन।
बारह दिनों की पूँजी है स्नेह और आशीर्वचन,
आप सभी स्वीकार करें हमारा हार्दिक नमन।
संध्या
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