लो,आ गया बसंत
दिनांक 26.01.2023 बसंत पंचमी पर.....
लो,आ गया बसंत
सुमनों के सौरभ से महकता बसंत
कलियों के घूँघट से निहारता बसंत
कोयल की कूक से कूकता बसंत
भँवरों के गुंजन से गूँजता बसंत
तितली के पाँखों पर उड़ता बसंत
बसन्ती बयार की छुअन में बसंत
आमों की अमराइयों में मचलता वसंत
खेतों-खलिहानों में बिखरा हुआ बसंत
सरस्वती पूजा की थाली में बसंत
फाग और गुलाल की लाली में बसंत
पर्वों और संगीत से सराबोर है बसंत
जन-जन को वासंती बनाता बसंत
अवनि से अम्बर तक छा गया बसंत
प्रभात से ‛संध्या' तक रंगीन है बसंत
पीत परिधान में सजा हुआ बसंत
प्रकृति का करता श्रृंगार बसंत
लो, झूमता-गाता चला आ रहा
ऋतुराज बसंत।
-संध्या जैन
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