KBC और श्री अमिताभ बच्चन



                                                         KBC और श्री अमिताभ बच्चन 

 ‛देवियों और सज्जनों नमस्कार', कहते जब श्री बच्चन,
बैठे ही हो जाता है ,अपना तो अभिनंदन ।


खेल खेल में पाएँ धन और हो जाए ज्ञान - वर्धन,

लक्ष्मी जी और सरस्वती का दिखता अद्भुत संगम।

 

कभी मिले अपार धन और कभी ना लगे ‛कनेक्शन',

दोनों को सिर माथे रखो ज्यों हों तिलक चंदन।


‛अमित है आभा' विद्या की,वाणी को बना लो भूषण,

कभी हार तो कभी जीत है सिखलाते श्री बच्चन।


महिलाओं के आंसू पोंछे बच्चों में जीयें बचपन,

छोटे बड़े में भेद न करते ज्ञान का करते पूजन|


डेढ़ घंटे तक परिवार में ना हो क्लेश न अनबन।

 के बी सी के चलते सब, बने रहें ‛देवी और सज्जन'।


- संध्या जैन


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